June – July 2016 : Amritavachan

June Amritavachan – 1:

प.पू. श्री डॉ. जी कहते है –

“ समाज कार्य में ‘यथा शक्ति’ कहना टीक नाही, यदि परिवार अपना है तो क्या उसके लिए ‘यथा शक्ति’ काम करते हो या उसमें तुम सर्वस्व समर्पण करते हो | समाज के विषय में भी यही भावना चाहिए | इसमे समझौता नहीं हो सकता | ‘फ़ुरसत’ के समय काम कर्णे की बात भी कृत्रिम है, अज्ञान है | इसमें न व्यक्ति का कल्याण, न समाज का | सच्चाई और निःस्वर्थं बुद्धि से काम करना ही स्वाभाविक है |

June Amritavachan – 2:

परम पूज्यनीय श्री गुरुजी यह कहते है की –

अपने इस कार्य की इतनी प्रगति हो के कभी जगद्गुरु कहलाने वाले इस पवित्र ध्वज के सामने एक बार पुनः संसार नत-मस्तक हो जाए, इसके चरणों में अपने जीवन की भेंट-चढाकर इसकी पूजा कर्णे के लिए बाध्य हो जाए | यही आकांक्षा, यही आवेश अपने अंतःकरण में उत्पन्न हो |

July Amritavachan – 1:

माननीय श्री बाबा साहेब् आप्टे जी यह कहते हैं की –

एक – एक व्यक्ति के पास यह विचार पहुँचाना कि अपने पास तन – मन – बुद्धि के संपूर्ण सामर्थ्य को जगत – जननी की प्रतीक स्वरूप भारत माता के चरणों में समर्पित करना है, एतदर्थ अनुकूल मनोवृत्ति का निर्माण करना और उनमें एक्सूत्रता की अनुभूति जागृत करना ही संघ का कार्य है | उसमें से एक दुर्धर्ष, दुनिया के साथ टक्कर लेकर भी पीछे न हटने वाला अजेय तथा सदैव – सर्वदा विजयी सामर्थ्य उत्पन्न करना हमारा उद्देश्य है |

July Amritavachan – 2:

Param pujaneeya Doctor Ji Says –

The Hindus must be made to feel intensely that they are one cohesive society. The concept of one Nationhood must be deeply engraved in their hearts. They must love one another and Share the common goal of raising up our country. This is the only way, the only positive and enduring way of national resurrection and this is what the Sangh is doing.

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